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(contest) क्या हिँदी सम्मानजनक भाषा के रुप मेँ मुख्य धारा मेँ लाई जा सकती है यदि हाँ तो किस प्रकार?नहीँ तो क्योँ नहीँ

Posted On: 10 Sep, 2013 Contest में

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जब भारत मेँ अंग्रेजी शिक्षा पद्धति की नीँव रखी गई तो लार्ड मैकाले ने कहा था कि आज के 50 वर्षो बाद जो भारतीय पैदा होँगे,वे शरीर से तो हिन्दुस्तानी होँगे लेकिन अपने मन विचार और कर्म से पूरी तरह अंग्रेज होँगे ।वे अपनी ही सभ्यता और संस्कृति का अन्धविरोध करेँगे। उनका उद्देश्य भारतीयोँ को मानसिक रुप से गुलाम बनाना था।जिसमे वे पूरी तरह से कामयाब रहे ,
लोगोँ के दिलोँ दिमाग पर अंग्रेजी पूरी तरह से हावी हो गई । और कभी स्वतंत्रता आन्दोलन तो कभी भक्ति आन्दोलन मेँ निर्णायक भूमिका निभाने वाली,सूर,कबीर और तुलसी के विचारोँ को जन जन मे संप्रेषण करने वाली मीठी बोली के रुप मे पूरी दुनियाँ मे प्रसिद्ध हिन्दी लगातार उपेक्षा का शिकार होती हुई अपने अर्वाचीन गौरव को खोकर छोटे से भूभाग मेँ सिमट कर रह गई।
हिन्दी भाषा को सम्माजनक भाषा के रुप मेँ लाने के लिए हमेँ सबसे पहले इस गुलामी की मानसिकता को बदलना होगा।
हिन्दी प्रेम की अलख लोगोँ के दिलोँ मे जगानी होगी,क्योकि जब चंद अंग्रेजी बोलने वाले हिन्दी भाषियोँ का उपहास करते है,तो हिन्दी भाषी चुप चाप इसे सुनते रहते हैँ ।और अपने आप को प्रतिभा हीन समझकर हीन भावना से ग्रसित हो जाते हैँ ,हमेँ इस सोच को बदलना होगा ।
सरकारी और निजी दफ्तरोँ मेँ कामकाज अंग्रेजी मेँ ही होते हैँ,जिससे लोग अंग्रेजी सीखने के लिए लालायित रहते हैँ
अत: द्फ्तरोँ मेँ कामकाज का माध्यम हिन्दी को बनाना चाहिए।
विभिन्न राष्ट्रोँ जैसे चीन जापान फ्राँस मेँ शिक्षा का माध्यम उनकी मातृभाषा है
अत: हमारे देश मेँ भी शिक्षा का माध्यम हिन्दी होना चाहिए ,जिससे छात्रोँ को विषय को समझने मे आसानी होगी, और हिन्दी भाषा की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी।
उद्योग जगत मेँ हिन्दीभाषी युवाओँ के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार होता है,सरकार को हिन्दी भाषीयोँ के लिए अलग से नीति बनानी चाहिए जिससे की उनका उत्पीड़न न हो,और कम्पनियोँ को अपने उत्पादोँ के नाम और प्रचार प्रसार हिन्दी मेँ करना चाहिए ,और यह समझना चाहिए कि उसके अधिकांशत: ग्राहक हिन्दी भाषी होते है अत: उनके हितोँ को भी ध्यान मे रखना चाहिए।
हिन्दी भाषा मेँ रोजगारपरक शिक्षा दी जानी चाहिए जिससे लोगो को आसानी से रोजगार मिल सके और वे अंग्रेजी सीखने को मजबूर न हो
और हिन्दी भाषा के विकास मे सबसे बड़ा रोड़ा दक्षिण के राज्योँ मेँ राजनीतिक कारणोँ से हिन्दी का व्यापक विरोध है
उन राज्योँ के निवासियोँ को विश्वास मेँ लेकर सरकार को एक आयोग का गठन करना चाहिए ,और हिन्दी भाषा का ज्ञान उन्हेँ प्रदान करना चाहिए और साथ ही साथ उनकी क्षेत्रीय भाषाओँ को हम हिन्दी भाषी लोगोँ को सीखना चाहिए जिससे एक तो आपसी विश्वास की डोर मजबूत होँगी और उनका डर भी निकलेगा कि हिन्दी का प्रसार उनकी सभ्यता और भाषा को मिटाने के लिए नहीँ हो रहा है
और हिन्दी का विस्तार भी होगा।
आज सोशल मीडिया मे अंग्रेजी का बोलबाला है ,आज तक तो मै यही मानता आया हूँ पर जब मै जागरण जंक्शन से जुड़ा तो मुझे सुखद अनुभूति हुई क्योँकि न जाने कितने लोग अंग्रेजी के इस आधिपत्य युग मेँ भी अपने विचारोँ लेखोँ और हिन्दी प्रतिक्रियायोँ से हिन्दी की मीठी सुगंध को देश विदेश मे फैला रहे है और हिन्दी के गौरव और मान सम्मान को बढ़ा रहे हैँ हम सब लोग मिलकर सोशल मीडिया को हिन्दीमय कर सकते हैँ।
हिन्दी भाषा को इसका हक दिलाने के लिए वाद विवाद लेखन और विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताए आयोजित की जानी चाहिए और प्रतिभागियोँ को आकर्षक पुरस्कार भी प्रदान किया जाना चाहिए
हिन्दी के विकास के लिए यदि हम सब त्याग ईमानदारी और समर्पण से थोड़ा थोड़ा भी प्रयत्न करते है ,तो हमारी मातृभाषा अवश्य ही अपने खोये हुए गौरव के प्राप्त करके
सर्वोच्च स्थान पर विराजमान होगी ।
और मैँ इस शेर के माध्यम से अपनी बात समाप्त करता हूँ
जब दुनियाँ की खुद्दार बोलियाँ
रँगमँच से गौण हो गई
तब मेरी यह प्यारी हिन्दी उस खंजर को भी तोड़ गई
जय हिन्द जय हिन्दी

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
September 11, 2013

सुन्दर ,सरल , ,बहुत उम्दा रचना। कभी यहाँ भी पधारें। सादर मदन

arunchaturvedi के द्वारा
September 14, 2013

श्री मदन जी प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।


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