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मोहब्बत न थी तेरे दिल मेँ ,मेरे खातिर

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मोहब्बत न थी तेरे दिल मेँ ,मेरे खातिर
वो तो बस तेरा दिखावा था
तेरी वो शोख अदायेँ
तेरी आँखोँ के इशारे
कातिलाना मुस्कान तेरी,
सब एक छलावा था
मै तो समझ गया था,वर्षो पहले
पर ये कमबख्त ,नादान दिल
ही उलझ के फँस गया तेरे जुल्फोँ के साये मेँ
जिसकी फितरत ही है फँस जाना, इसे तो फँस जाना था
मैने सौ बार समझाया था, बतायी थी तेरी हकीकत
पर ये तेरे चाँद से चेहरे और चंचल निगाहोँ का दीवाना था
मासूम दिल फँस ही गया तेरे नाजोँ नखरोँ मेँ
जिसकी फितरत ही है फँस जाना ,इसे तो फँस जाना था

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Pradeep Kesarwani के द्वारा
September 2, 2013

सुंदर लेखन बधाई

arunchaturvedi के द्वारा
September 14, 2013

श्री केसरवानी जी उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।


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