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मै मासूम था ,जो बदलता न था

Posted On: 31 Aug, 2013 Others में

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मै मासूम था, जो बदलता न था
जमाने के सच को समझता न था
लोग मिलते रहे और बिछड़ते रहे
उनकी यादोँ मेँ मै बस तड़पता रहा
मै मासूम था जो बदलता न था
जमाने के सच को समझता न था
मै हमदर्द जिनको समझता रहा
उनकी नजरोँ मेँ मै एक खिलौना भर था
खेलकर मुझसे जी भर ,राह चलते बने
दर्द देते रहे ,मै दवा समझता रहा
मै मासूम था जो बदलता न था
जमाने के सच को समझता न था

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
September 2, 2013

मै हमदर्द जिनको समझता रहा उनकी नजरोँ मेँ मै एक खिलौना भर था खेलकर मुझसे जी भर ,राह चलते बने दर्द देते रहे ,मै दवा समझता रहा मै मासूम था जो बदलता न था जमाने के सच को समझता न था बहुत उत्कृष्ट अभिव्यक्ति.हार्दिक बधाई और शुभकामनायें! कभी यहाँ भी पधारें


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